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पागल मन बके दनादन

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क्या पता था मैय्या मोहे

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क्या पता था मैय्या मोहे

ऐसी निर्मोही दुनियां होगी

मर्द मोहे भकोटेंगे हरदम

श्रप्त मेरी यौवानियां होगी

 

क्या पता था कि

नन्हे पगों से जब

मैं तेरा आँगन मापुंगी

नए फूटे कंठ से मैं

माँ माँ शब्द अलापुंगी

उसी आँगन में बैठा एक

सर्प मुझे डस जायेगा

असीम पीड़ा के पाश में मुझको

इस तरह कस जायेगा

कि साँस आरी सा काटेगी मुझको

वजूद मेरी बेगुनिया होगी

 

क्या पता था मैय्या मोहे

ऐसी निर्मोही दुनियां होगी

मर्द मोहे भकोटेंगे हरदम

श्रप्त मेरी यौवानियां होगी

 

बचपन की दहलीज पार कर

यौवन को मैं अंग लगा

उडी थी मैं उन्मुक्त गगन में

अरमानो के पंख लगा

पर क्या पता था कि

वासना का पिंजरा लेकर

एक सैय्याद आएगा

मोरा लज्जा वसन कुतर कर

नग्न मुझे कर जायेगा 

कि साँस आरी सा काटेगी मुझको

वजूद मेरी बेगुनिया होगी

 

क्या पता था मैय्या मोहे

ऐसी निर्मोही दुनियां होगी

मर्द मोहे भकोटेंगे हरदम

श्रप्त मेरी यौवानियां होगी

 

मैय्या मोहे तू हाला दे दे

विष का मोहे प्याला दे दे

क्या करुँगी मैं जी कर मोहे

आत्म-दाह की ज्वाला दे दे 

 

तोड़ कलंक के कफ़स को जब

रूह की पाखी उड़निया होगी

वेदना की वीथिका से विदा

मैय्या फिर तेरी मुनियां होगी

 

क्या पता था कि

साँस आरी सा काटेगी मुझको

वजूद मेरी बेगुनिया होगी

 

क्या पता था मैय्या मोहे

ऐसी निर्मोही दुनियां होगी

मर्द मोहे भकोटेंगे हरदम

श्रप्त मेरी यौवानियां होगी

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashishgonda के द्वारा
December 30, 2012

आदरणीय! बिलकुल ह्रदयवेधती रचना है..जरूरत है इस पर विचार कर जिंदगी में ढलने की है……. http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/12/28/%e0%a4%a4%e0%a5%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a5%80/

ajaykr के द्वारा
December 26, 2012

बहुत ही मर्मस्पर्शी रचना !

December 25, 2012

सादर प्रणाम! तत्कालीन मानसिक प्रवृति को उजागर करती…..सशक्त और सार्थक रचना…………………..कृपया इसे भी पढना चाहें…………………… http://follyofawiseman.jagranjunction.com/2012/12/24/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b/


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