Laptop wala Soofi

पागल मन बके दनादन

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अश्कों की स्याही से लिखे हर्फ़-ए-ग़म मेरे

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सोंचा ख्यालों के छैनी हथौडों से दिल की मरम्मत कर लूं

मैं टूटे-फ़ूटे शब्दों से अपने अहसासों को कलमबद्ध कर लूं

और इसलिये कुछ कच्चा पका सा बेलुत्फ़ बेतकसीर लाया हूं

मैं आपकी खिदमत में अपने सीने से चंद जज़्बातें चीर लाया हूं ;

बेहूनर हैं हाथ मेरे और जज़्बातों में उफ़ान बहुत है

मुमकिन है शब्दों का भटकना सीने में तुफ़ान बहुत है

माफ़ करना अगर जो मैं नज़्मों कि बिगडी तस्वीर लाया हूं

कुछ बेदानीशपन में ,कुछ खुशफ़हम में,जो बेतरीब तहरीर लाया हूं

 

बडा जज़्बाती हूं मैं,हमेंशा दिल से काम लेने वाला और शायद इसलिये ज़िन्दगी के शतरंजी बिसात में जहां लोगों के महात्वाकांक्षी घोडे. नैतिकता के खाने को फ़ांदकर ढाई चाल चलते हैं,नैतिकता की सुस्त चाल चलने वाला मेरे दिल का मोहरा अक्सर पिट जाता है……..पेशे खिदमत है आपके मेरे पिटे दिल की कुछ कराहें:

 

 

दरिया-ए-पायाब हूं मैं ,एक समन्दर तलाश रहा हूं
मैं गर्दिश-ए-अय्याम में,अपना मुकद्दर तलाश रहा हूं

 

********************************************************

 

अपने सीने मे हम टूटे ख्वाबों का चुभन रखते हैं
दर्द के तलबगार है इसलिये शौके सुखन रखते हैं

 
*******************************************************

 

बेमुरब्बत आंधियों के हवाले जो चराग ए यार करते हो
बडे. खुदफ़रेबी हो जो किसी हसीना से प्यार करते हो

 

**************************************************************

 

अपने ज़िन्दगी का खस-ओ-खुशबू हम कब का बांट आये
अब जो सांसों में बचा है वो बस खुश्क हवाऒं का कतरा है

 
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शबे तसव्वुर में जिसे हम चांद समझा करते थे
नींद से जागा तो पाया वह दहका अंगारा था
और जो था खामेख्याली का हंसी मनाज़िर
वो मेरे हीं किस्मत का टूटता सितारा था

 

**************************************************

       किसी शिकस्ता दिल से पूछो कि
       मुहब्बत किस शै का नाम है
      ये वो अज़ाब(सज़ा) है जिसमे
        सपने सलीब पे चढते हैं

 

************************************************

 

तोड. दूं मैं हर आइना,अक्सबारी का हर साजोसामान
कि जिधर देखता हूं मुझे तू हीं तू नज़र आती है

 

**********************************************************

            

        ज़िन्दगी की मुसाफ़त में हर कोइ रवां होता है
    किसी के पैरों तले शबनम किसी के शोला दबा होता है
          किसी के पैमाने में मयस्सर होत है सागर
           किसी के हलक पे तश्ने सेहरा होता है

 
****************************************************************

सपने सिरहौने रख कर शबगुज़ारी करते हैं
हम वो जुगनू हैं जो रात भर जलते हैं

 

*****************************************************************

 

शीशे और पत्थर का इश्क तेरा मेरा
अंजाम बस टूटने के सिवा क्या है

 
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सोंचते हैं कि इस मुख्तसर ज़िन्दगी में क्या बन के जियें,
कोई माशुका मिल जाये तो अहले-वफ़ा बन के जियें

 

**************************************************************

 

मैं शीशा हूं तू पत्थर है,तू मेरा अहले मुकद्दर है
मैं जीयुंगा या मर जाउंगा,ये फ़ैसला तेरे ऊपर है

      

*********************************************************

 

क्युं इश्क में हर सितम हम सहें 
तुम खुश रहो और गम हम सहें

****************************************     

 

नूरानी चांद की नक्काशी आज की रात में ,
पूराने शराब की सरताबी आज की रात में,
आज की रात खुशनूमा बडा. मंज़र है ,
फ़िर भी ये चुभता है ऐसे जैसे खंज़र है ,
न जाने कैसी है उदासी आज की रात में ,
तन्हा दिल रोता है मेरा,जो तू नहीं साथ में

*************************************************

 

उनको महबूब परस्ती का शौक था ,
हममें इश्क पे लुटने का शौक चस्पा था ,
वो मुस्कुराते हुए कत्ल करते थे,
हममें मुस्कुराते हुए मरने का जज़्बा था ,
हुस्न और इश्क दोनो ने नियाज़ पा लिया,
हुस्न ने इश्क को और इश्क ने हुस्न को आज़मा लिया,
वो लूटते लूटते बन गये अहले-करम,
हम लुटते लुटते बन गये अहले-करम,
रंगे-रिवाज़ों का ये ऐसा झरोखा था ,
इस तरफ़ वफ़ा थी उस तरफ़ धोखा था :

 

********************************************

 
कौन कहता है दर्द से शिक्त आवाजें                                                
बडी. पुरकशीश होती हैं ,                                                                                   
खींच लाती हैं अपनों को ;                                                                                      
गर ऐसा होता तो मुझपे
यूं बेज़ाड. तन्हाईयों का                                                         
साया न होता:   

 

********************************************

 

तुम कहां हो कि तुम्हें भेजी उम्मीदों की बैरन चिट्ठी मेरी,
हर बार मेरे हीं पते पे लौट जाती है:
तुम कहां हो कि तुम्हें भेजा मेरे मुहब्ब्त का हर पयाम,
तन्हां वादियों में पूकारे आवाज के मानिंद
बार-बार मेरे हीं दयार में गुंजता है:
क्या कभी मेरे पुरसोज़ सांसों का कोई लम्स ,
कोई छूअन तुम्हें महसूस नहीं हुआ :
क्या कभी मेरे आंखों से छलकते
किसी अश्क के कतरे ने तुमको नहीं छुआ :
क्या तुम्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि
मैं तुम्हें मुसलसल पूकार रहा हूँ :
क्या तुम्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि
तुम्हारे इंतज़ार में मैं अपनी सांसें हार रहा हूं:
इससे पहले कि मेरे मुख्त्सर ज़िंदगी का सूरज ढल जाए कहीं :
आ जाओ कि विरहन की आग में न हम जल जाएं कहीं:
          

 
*****************************************************************

अपने हिस्से का सूरज हम बांटने गये थे
कल जिस अंधियारे के बाशिन्दे को ,
आज उसी को हमने किसी से
रौशनी की सौदागरी करते देखा,

******************************************

 

तर्ज़े-तपाक-अहले-दुनियां कुछ इस तरह की है ,
कि कोई हाल भी पूछे तो दिल को शुबह होता है.

 

**********************************************

 

दिल दस दलीलें देकर कहता है मोहब्बत करने को,
ज़िन्दगी ज़ख्मे-जिगर दिखाकर हौसला पस्त कर देती है

***********************************************************
ए दर्द तुझे मेरे आंखों पे अता होना हीं होगा,
ज़माने की शिकायत है कि हम बहुत हंसते हैं

****************************************************
उस पुर्णमासी की रात जब चांद की गागरी से चांदनी छलक रही थी,
ज़रूर चुपके से तूने अपने रूख में वो कतरा-ए-नूर भर लिया होगा

 

************************************************************************
 

जो बेइश्क ज़िंदा हो तो मियां क्या खाक ज़िंदा हो,
इश्क करने वाले तो बाद-ए-फ़ना भी जीया करते हैं.

 

 

*********************************************************
वो चाक ज़िगर पे करते हैं
फ़िर खैरो-बरकत पूछते हैं

***************************************

कब कैसे इस कदर ग़म हुआ मुझमे पिन्हाँ
न इल्म-ए-इब्तिदा मुझको न इल्म-ए-इम्तहाँ

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94 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sinsera के द्वारा
June 29, 2012

पवन जी, नमस्कार.. दीवान-ए-पवन पढने में मैं काफी लेट हो गयी लेकिन बहुत लाजवाब ..अलग अलग मूड के अलग अलग शेर जैसे एक ही थाली में छप्पन भोग.. “तारीफ” लफ्ज़ में कुछ और हर्फ़ जोड़ने पड़ें गे….

sakhiwithfeelings के द्वारा
June 8, 2012

अचा लिखा है अपने पवन ji

Archana chaturvedi के द्वारा
June 6, 2012

मज़ा आगया पढ़ के आप की शायरिया …….

    pawansrivastava के द्वारा
    June 7, 2012

    अर्चना जी शायराना अंदाज में दादे सुखन देने के लिए शुक्रिया

rekhafbd के द्वारा
June 6, 2012

बेस्ट ब्लागर आफ द वीक बनने पर हार्दिक बधाई ,पवन जी

    pawansrivastava के द्वारा
    June 7, 2012

    शुक्रिया रेखा जी

mparveen के द्वारा
June 5, 2012

congratulations for being best blogger of the week..

    pawansrivastava के द्वारा
    June 7, 2012

    thank u very much for your kind appreciation

yamunapathak के द्वारा
June 5, 2012

बेस्ट ब्लॉगर बनाने की बहुत बहुत बधाई.शेर अछे लगे.

    pawansrivastava के द्वारा
    June 5, 2012

    यमुना जी आपको शेर अच्छे लगे ,सुनकर चित्त प्रसन्न हुआ ..धन्यवाद .

jalaluddinkhan के द्वारा
June 5, 2012

अच्छे भावों से सजी रचना.बधाई.

    pawansrivastava के द्वारा
    June 5, 2012

    शुक्रिया जलालुद्दीन साहब ..बस दिल के जज्बातों को इमानदारी से कलमबद्ध कर दिया है मैंने .

manu shrivastav के द्वारा
June 4, 2012

बहुत बढ़िया दिल को छू लेने वाली रचनाएँ

    pawansrivastava के द्वारा
    June 4, 2012

    शुक्रिया मनु जी

मनु (tosi) के द्वारा
June 3, 2012

वाह !!! आदरणीय पवन जी आपकी रचना के लिए यही कहा जा सकता है ,,,  ए दर्द तुझे मेरे आंखों पे अता होना हीं होगा, ज़माने की शिकायत है कि हम बहुत हंसते हैं….बहुत बढ़िया बेहतर संयोजन … बधाई आपको और बेस्ट ऑफ द वीक के लिए बहुत-बहुत बधाई …. सादर

    pawansrivastava के द्वारा
    June 4, 2012

    आपके बहुमूल्य प्रशंशा के लिए धन्यवाद Manu तोसी जी …

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 3, 2012

बहुत सुन्दर गजल,पवन जी.’Best bloger of the week’ की बधाई!!

    pawansrivastava के द्वारा
    June 4, 2012

    तारीफ के लिए बहुत बहुत शुक्रिया राजीव जी

Sudha Upadhyay के द्वारा
June 1, 2012

congratulations for being best blogger of the week….great work done.

    pawansrivastava के द्वारा
    June 4, 2012

    Sudha Ji Thank you very much for your generous praise

meenakshi के द्वारा
June 1, 2012

पवन जी, ब्लागर आफ दि वीक बनने के लिए हार्दिक बधाई ! अश्कों की स्याही बहुत ‘ खूब ‘ बहाई है . मीनाक्षी श्रीवास्तव

    pawansrivastava के द्वारा
    June 1, 2012

    मिनाक्षी जी दिल से आभार आपका

sadhna srivastava के द्वारा
June 1, 2012

Congratulations dada!! i know….. :) :) but i wanted to… once again…. or i can say…… lets see….. :) :)

    pawansrivastava के द्वारा
    June 1, 2012

    I understand your sisterly affinity & concern & appeciate it

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 1, 2012

आदरणीय पवन जी, सादर मुबारक हो आपको ख़िताब suhana hamesha बढ़िया गजलें लाना बधाई

    pawansrivastava के द्वारा
    June 1, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, नज्मो का लायेंगे हम एक से बढ़कर एक खज़ाना .. बस आप इसी तरह हमपर अपना स्नेह बरसाना

ashokkumardubey के द्वारा
June 1, 2012

ब्लागर आफ डी वीक बन्ने केलिए हार्दिक बधाई

    pawansrivastava के द्वारा
    June 1, 2012

    अशोक जी बधाई के लिए हार्दिक धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
June 1, 2012

ब्लॉगर ऑफ  द वीक  बनने की हार्दिक  शुभकामनायें स्वीकृत  करें।

    pawansrivastava के द्वारा
    June 1, 2012

    धन्यवाद Dinesh जी

Farhat Ali Khan Yousufzai के द्वारा
May 31, 2012

अशआर हैं आपके बिखरे हुए… उर्दू की चाशनी में डूबे हुए… नाक़द्रों की दुनिया में मुझको तो आप… मालूम होते हैं एक शायर मंझे हुए…

    pawansrivastava के द्वारा
    June 1, 2012

    वैसे फरहत साहब व्यंग्य के मीठे चाशनी में डुबो के शब्दों का शमशीर चलाने का अंदाज कोई आपसे सीखे ….कर्फ्युनामा में आपका अंदाजे-सुखन देख आया

krishnashri के द्वारा
May 31, 2012

स्नेही पवन जी , सादर , आपके शेरों को पढ़ कर बस इतना ही कह सकूंगा , बहुत सुन्दर . आपने उर्दू लफ्जों का अर्थ प्रतिक्रया के वाक्स में लिखा है , यदि शेरों के आखिर में लिखा होता तो बार बार ऊपर नीचे नहीं करना पड़ता , फिर भी बहुत आन्नद आया , मेरी शुभकामनाएं .

    pawansrivastava के द्वारा
    June 1, 2012

    आदरणीय कृष्णा जी ….आपको हुई असुविधा के लिए माफ़ी चाहता हूँ ….आइन्दा से आपके दिए गए मशवरा को ज़रूर अमल में लाऊंगा

shaktisingh के द्वारा
May 31, 2012

जनाब बेस्ट ब्लॉगर ऑफ दी वीक बनने पर बधाई

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    धन्यवाद शक्ति साहेब

Mohinder Kumar के द्वारा
May 31, 2012

पवन जी, सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ ब्लोगर की पदवी पर आसीन होने पर हार्दिक शुभकामनायें स्वीकारें.

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    मोहिंदर जी आप जैसे शुभ- एच्छुओं के शुभकामनाओं का परिणाम है यह ..धन्यवाद

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 31, 2012

पवन जी, सारे के सारे के सारे शेर वज़नदार | बधाई ! साथ ही बेस्ट ब्लौगर बनने के लिए भी!

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    आचार्य जी हार्दिक धन्यवाद आपका

D33P के द्वारा
May 31, 2012

best bloger of the week की बधाई स्वीकार करे ……..

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    शुक्रिया दीप्ती जी

vikramjitsingh के द्वारा
May 31, 2012

पवन जी….. हमारी तरफ से ढेरों शुभकामनाएं…..

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    धन्यवाद विक्रम जी

yogi sarswat के द्वारा
May 31, 2012

नूरानी चांद की नक्काशी आज की रात में , पूराने शराब की सरताबी आज की रात में, आज की रात खुशनूमा बडा. मंज़र है , फ़िर भी ये चुभता है ऐसे जैसे खंज़र है , न जाने कैसी है उदासी आज की रात में , तन्हा दिल रोता है मेरा,जो तू नहीं साथ में उफनते विचार हैं ! उबलते हुए से ! कितनी तारीफ करी जाये ? बहुत ही उम्दा ! लेकिन एक बात कहूँगा , अगर इसे दोबार में लिखते और भी ज्यादा बेहतर होता ! बधाई

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    योगी साहब आपके बेशोकीमती सलाह का आइन्दा ख्याल रखूँगा

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 31, 2012

Pawan ji Congratulations …

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया महिमा जी

sadhna srivastava के द्वारा
May 31, 2012

yay!!!!!!!! BIG CONGRATULATION Dada……. :)

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    Dear साधना ! JJ ने जो इज्ज़त नवाज़ा है ,उसके लिए JJ का तहे दिल से शुक्रिया …..और तुम और JJ के सभी सबों दोस्तों का भी हिरदय से आभारी हूँ …तुम सबों के मुसलसल हौसला आफजाई के बदौलत हीं यह मुमकिन हो पाया .

pawansrivastava के द्वारा
May 31, 2012

FOR THOSE WHO TEND TO CRITICIZE ALL THE TIME :( यह शेर उनके लिए जो नुक्ता-चीनी करने में माहिर हैं ): दरम्याने-दरख़्त वो चाँद उनको बनबेरी का बन्दर लगता है उनकी नक्काद निगाहों में मकबूल भी कमतर लगता है MEANING :दरम्याने-दरख़्त -पेड़ के ओट से ; नक्काद निगाहों – critical lookout ;मकबूल -श्रेष्ठ :

vikramjitsingh के द्वारा
May 30, 2012

वाह!! पवन जी वाह….!!! आपने तो एक नए रंग में रंग दिया सारी फिजां को…. सही कहा आपने…. ”बे-इश्क ज़रा आदमी की शान ही नहीं….. जिसको न होवे इश्क…वो इंसान ही नहीं….”

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    शुक्रिया विक्रम जी ,दिल से शुक्रिया आपका

आर.एन. शाही के द्वारा
May 30, 2012

आतिशबाजी के आसमानी अनारदाने सरीखे आपके सतरंगी जज़्बात छिटक-छिटक कर बरसे हैं. बधाई लीजिये ज़नाब !

    pawansrivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    शाही साहब ..आपके तारीफ़ करने का अंदाज़ भी आपके नाम के तरह शाहाना है …बहुत बहुत शुक्रिया आपका

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 30, 2012

आदरणीय पवन जी, सादर हिंदी शब्दों के साथ शेर, गजल बहुत खूब सूरती से कही गयी है. बयां नहीं कर सकता. किसे चुनु किसे छोडूं कोई जगह नहीं दिखती दुधवा से शेर उड़ गए पवन के झोंको में सुरभित सुगंध बह चली उन झरोखों में फूल फूल जुड़ गए बनी माला खुदा का फजल पवन जी ने लिख डाली सुन्दर सी गजल. बधाई

    pawansrivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी …..इसे कहते हैं सौ सुनार की और एक लुहार की …..आपके इन चार लाइनों ने मेरे ४० लाइनों को धराशायी कर दिया :) :)

pawansrivastava के द्वारा
May 30, 2012

दोस्तों आपके हुक्म की तामिल करता हुआ नीचे उर्दू के कठीन शब्दों के शब्दार्थ लिख रहा हूँ : दरिया-ए-पायाब -ऐसा दरिया जिसमे घुटने तक ही पानी हो गर्दिश-ए-अय्याम-बूरा वक़्त शौके-सुखन -लिखने का शौक तर्जे-तपाक-अहले दुनिया : दुनिया वालों के मिलने का अंदाज शबे-तसव्वुर -The imagination in the night मुख़्तसर-small मनाज़िर-दृश्य लम्स -छुअन रुख-चेहरा इल्म-ए-इब्तिदा-knowledge of beginning इल्म-ए-इम्तहाँ-knowledge of end पिन्हाँ -छिपा हुआ बाद-ए-फनाह :मरने के बाद खामे-ख्याली -Day Dreaming शै-चीज मुसाफ़त -सफ़र तश्ने-सेहरा-मरुस्थल की प्यास शब्-गुज़ारी -रात गुजारना अहले-मुकद्दर-मुकद्दर लिखने वाला नियाज पाना -इच्छा का पूरा होना मुसलसल-लगातार

May 30, 2012

पवन सर, आप ने मोहब्बत के समुन्द्र में मुझे इतने गोते लगा दिए कि मेरी तो सांस ही उखड़ने लगी………………….! अरे हम तो पहिले से ही मर रहे हैं……….बीच-बीच में मुझे मारने कि तैयारी क्यों करते हैं आप लोग……….. रात ढल गयी मगर, कुछ बात अभी बाकी है, परवाना जल गया, मगर रख अभी बाकी है, कैसे भूल जाऊ उस हसीं चेहरे को ‘अलीन ‘ भर गया जख्म फिर भी दाग अभी बाकी है………………..! सुबह होश संभाला, रुख किया जब उसके कुंचें की ओर ‘अलीन’ ताज्जुब था देखकर सूरज सर पर और अब तक बेहोश थे सभी. जो कहता है, अलीन हार गया सबकुछ मोहब्बत में, बड़ा अजीब है वो शख्स, उसे कुछ दिखता ही नहीं. यहाँ मैं हरेक रात को घनघोर अँधेरा कैसे कह दू, लगता है उसे, अँधेरे के बाद उजाला दिखता नहीं. चलो मान लेता हूँ, हार गया सब कुछ मोहब्बत में, क्या किसी को भी इस हार में, एक जीत दिखता नहीं. तुम अंधों का शहर है या हमारी मोहब्बत अंधी कि देखते हो सबकुछ मगर तुम्हें कुछ दिखता नहीं. अफ़सोस अब तक हारा नहीं कुछ भी मोहब्बत में, लाख कोशिश किया तुमने मुझे हराने को यहाँ, कैसे दूर करू तुम्हारी गलतफहमी को, जहाँ अभी हारने को गीता है बाकी, अभी कुरान है बाकी, अभी यह जहान है बाकी, अभी वह जहान है बाकी, अभी हम इंसान है बाकी, अभी भगवान है बाकी, यक़ीनन यह हार नहीं मिहब्बत में अपनी ‘अलीन’ अबतलक मैं हूँ बाकी, मेरा इमान है बाकी……………. जल्दी-जल्दी में शेर लिखने में बहत जगह पक्तियां ढीली पड़ गयी हैं….जिसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ……..दरअसल आपके उपरोक्त शेरोन को पढ़ने के बाद मेरी कलम रुकी ही नहीं……………..!

    May 30, 2012

    उपरोक्त अलग-अलग चार शेर लिखा हूँ …किन्तु उनके बिच स्पेस देने पर भी स्पेस नहीं दिख रहा लग रहा है……………..इन पर भी मोहब्बत का सर हो गया ……… रात ढल गयी मगर, कुछ बात अभी बाकी है, परवाना जल गया, मगर रख अभी बाकी है, कैसे भूल जाऊ उस हसीं चेहरे को ‘अलीन ‘ भर गया जख्म फिर भी दाग अभी बाकी है………………..! —————————————————————– जो कहता है, अलीन हार गया सबकुछ मोहब्बत में, बड़ा अजीब है वो शख्स, उसे कुछ दिखता ही नहीं. यहाँ मैं हरेक रात को घनघोर अँधेरा कैसे कह दू, लगता है उसे, अँधेरे के बाद उजाला दिखता नहीं. चलो मान लेता हूँ, हार गया सब कुछ मोहब्बत में, क्या किसी को भी इस हार में, एक जीत दिखता नहीं. तुम अंधों का शहर है या हमारी मोहब्बत अंधी कि देखते हो सबकुछ मगर तुम्हें कुछ दिखता नहीं. —————————————————————- सुबह होश संभाला, रुख किया जब उसके कुंचें की ओर ‘अलीन’ ताज्जुब था देखकर सूरज सर पर और अब तक बेहोश थे सभी. ——————————————————————- अफ़सोस अब तक हारा नहीं कुछ भी मोहब्बत में, लाख कोशिश किया तुमने मुझे हराने को यहाँ, कैसे दूर करू तुम्हारी गलतफहमी को, जहाँ अभी हारने को गीता है बाकी, अभी कुरान है बाकी, अभी यह जहान है बाकी, अभी वह जहान है बाकी, अभी हम इंसान है बाकी, अभी भगवान है बाकी, यक़ीनन यह हार नहीं मिहब्बत में अपनी ‘अलीन’ अबतलक मैं हूँ बाकी, मेरा इमान है बाकी…………….

    pawansrivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    वाह वाह अनिल जी ..आपने तो अपना दिल उड़ेल के रख दिया ….मुझे इसी अंदाज़ वाला अनिल पसंद है -मुहब्बत की दर-इम्तेहांई वाला अनिल :)

    rdx4u के द्वारा
    May 31, 2012

    बे-लज्जत हर्फों के कूड़े की वाहवाही करने वाले वीरों ! धन्य हो ! धन्य हो !

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    श्रीमान rdx जी मैंने सोंचा की कूड़े को हीरे में कैसे तब्दील किया जाता है ,इसका नुख्सा मैं आपसे सीख लूं ..आपके ब्लॉग पे गया तो o पोस्ट देखकर बात समझ में आ गयी कि आप उनलोगों में से हैं जिनके पास वक़्त अफ़रात है और अक्ल कम ..जो खुद तो लिखते नहीं हाँ दूसरों के लिखे पर खूब नुक्ताचीनी करते हैं … बहुत मुमकिन हैं कि आप किसी और नाम से इस JJ मंच पे सक्रिय हों और कुछ इस अंदाज वाले शख्स हों -’मैं हूँ बाबु कलम घसीटा ,थका हरा मारा पिटा’ और हीन भावना से ग्रसित हों …..तभी तो क्षदम नाम से अपना गुबार निकलते रहते हैं …. ठीक आप जैसे कुछ पडोसी भी होते हैं ….उनके मद्दे-नज़र एक कूड़ा अर्ज़ करता हूँ ,गौर फरमाइयेगा : मेरा पडोसी अपने बेटों के बूरी लतों पे उनसे खफ़ा है और मुझसे दर खफ़ा है कि मैंने वो बूरी लतें क्युं न पाली आप को यह समझना चाहिए कि यह मंच केवल गुलज़ार और जावेद साहब जैसे मकबूल रचनाकारों के लिए नहीं हैं …..कुछ हमारे जैसे भी गए गुजरे लोग हैं जो अपने जज्बातों को शब्दरूपी आलंबन देते रहते हैं …..दोष मेरा हो सकता है पर उनका कतई नहीं जो हम जैसे लेखकों का हौसला आफजाई करते हैं …बेहतर लिखने के लिए प्रेरित करते हैं . अंत में अपने भावनाओं को बयाँ करता एक और कूड़ा आपकी खिदमत में वजा लाता हूँ : ना सही अर्श का आफ़ताब मैं एक टिमटिमाता जुगनू हीं सही : ज़र्रा जरा हीं सही पर कतरा-ए-ज़ुल्मत तो मैं भी मिटाता हूं

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    और हाँ RDX साहब लगता है आप जल्दबाजी में मेरे कूड़े को अनुमोदित करती मेरी आत्मस्विकारुक्ति पढ़ना भूल गए इसलिए इसे दुबारा यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ ……….. सोंचा ख्यालों के छैनी हथौडों से दिल की मरम्मत कर लूं मैं टूटे-फ़ूटे शब्दों से अपने अहसासों को कलमबद्ध कर लूं और इसलिये कुछ कच्चा पका सा बेलुत्फ़ बेतकसीर लाया हूं मैं आपकी खिदमत में अपने सीने से चंद जज़्बातें चीर लाया हूं ; बेहूनर हैं हाथ मेरे और जज़्बातों में उफ़ान बहुत है मुमकिन है शब्दों का भटकना सीने में तुफ़ान बहुत है माफ़ करना अगर जो मैं नज़्मों कि बिगडी तस्वीर लाया हूं कुछ बेदानीशपन में ,कुछ खुशफ़हम में,जो बेतरीब तहरीर लाया हूं

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    दादा आपके “कूड़े” में भी बहुत खुशबू है…… :) लेकिन इन महानुभाव तक नहीं जाएगी….. जुकाम हो गया होगा अब तक तो….. :) :)

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    कृपया ‘नुख्सा’ को ‘नुस्खा’ पढ़ें

    pawansrivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    साधना मेरा एक और कूड़ा : दरम्याने-दरख़्त वो चाँद उनको बनबेरी का बन्दर लगता है उनकी नक्काद निगाहों में मकबूल भी कमतर लगता है MEANING :दरम्याने-दरख़्त -पेड़ के ओट से ; नक्काद निगाहों – critical lookout ;मकबूल -श्रेष्ठ : :) :) :)

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 31, 2012

    बहुत खूब…….. :) :)

    May 31, 2012

    मेहमानों की खिदमत करना कोई आप से सीखे………………………! साधना जी सही कहती है….आप तो बापों के बाप है…………..अर्थात दादा …………..!

    pawansrivastava के द्वारा
    June 1, 2012

    अनिल जी ! जब आप जैसे प्यारे लोग हों तो खिदमतगारी तो लाज़मी है :)

dineshaastik के द्वारा
May 30, 2012

पवन जी आपके शेर  निश्चित  ही बहुत खूबसूरत हैं, लेकिन  कहीं कहीं भाषा  अर्थ  को समझने में बाधा उत्पन्न करते हैं कृपया कठिन  उर्दू  शब्दों का अर्थ लिख  दिया करें।

    jlsingh के द्वारा
    May 30, 2012

    पवन जी, सादर अभिवादन! मैं भी यही कहना चाहता हूँ. आपने काफी गहराई में डुबकी लगाई है. मैं तो समुद्र के किनारे बैठ कुछ सीपियों का इन्तजार करता रह गया. कृपया कठिन उर्दू लब्जों के अर्थ (कोष्ठक) में दे दियां करें तो समझाने में तो आसानी होगी ही .. हमलोग भी कुछ कुछ उर्दू सीक जायेंगे!

    pawansrivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    दिनेश भाई मैंने आपकी शिकायत पे त्वरित करवाई कर दी है

    pawansrivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    सिंह साहब मेरे ब्लॉग का पुनरवलोकन करें …मैंने आपके हुक्म की तामिल बजाते हुए प्रतिक्रिया प्रकोष्ठ में कठिन उर्दू शब्दों का अर्थ लिख दिया है …

चन्दन राय के द्वारा
May 29, 2012

पवन मित्र , दरिया-ए-पायाब हूं मैं ,एक समन्दर तलाश रहा हूं मैं गर्दिश-ए-अय्याम में,अपना मुकद्दर तलाश रहा हूं अपने सीने मे हम टूटे ख्वाबों का चुभन रखते हैं दर्द के तलबगार है इसलिये शौके सुखन रखते हैं इन दोनों शेरो से मित्र खुद को जुडा पाता हूँ , हर शेर अपने आप में जबरदस्त भाव लिए , हमेशा की तरह उम्दा रचना और शयराना अंदाज

    pawansrivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    मित्र चन्दन , आपके मुक्त-कंठ प्रशंसा के लिए आपका आभारी हूँ

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 29, 2012

पवन जी, सादर- आपका शायराना अंदाज मुझे बहुत पसंद आया. एक-एक शेर बाकई में बहुत ही खूबसूरती से लिखा गया है. हरेक शेर कोई न कोई सदेश दे रहा है. दिल दस दलीलें देकर कहता है मोहब्बत करने को, ज़िन्दगी ज़ख्मे-जिगर दिखाकर हौसला पस्त कर देती है *********************************************************** ए दर्द तुझे मेरे आंखों पे अता होना हीं होगा, ज़माने की शिकायत है कि हम बहुत हंसते हैं

    pawansrivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    हनीफ साहब आपके बेशोकीमती तारीफ़ के लिए दिल से शुक्रिया

Mohinder Kumar के द्वारा
May 29, 2012

पवन जी, दिलकश अशारात पढवाने के लिये शुक्रिया.

    pawansrivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    मोहिंदर जी ज़र्रा-नवाजी के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 29, 2012

पवन जी ..क्या बात है , क्या बात है , क्या बात है ……:) :) :) लगता है पहला प्यार नहीं भूले , जब पजामे पहन कर छत पे पतंगे उड़ाते होगे और वो किसी छत पे खड़ी होगी और आपके पेचे लड़ी होगी ::) क्यों ठीक कहा न :) और वो हुक अभी भी कभी कभी उठती है या किस्सा कुछ दूसरी तरह का है पर है तो सही :) बरहाल अभी तो आप खुशनुमा वैवाहिक जीवन का लुफ्त उठा रहे है फिर भी कहा उसे भुला पा रहे है :) मजाक कर रही हूँ .. आपकी सुखी जीवन की शुभकामनायो के साथ खुबसूरत नज्म , शेर , कवितायों को साझा करने के आपका बहुत -२ धन्यवाद और ढेरो बधाई

    pawansrivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    महिमा जी ..तारीफ के लिए शुक्रिया …वैसे आपकी जानकारी के लिए बताना चाहूँगा कि मैं पजामा पहन के कभी पतंग नहीं उडाता था …..क्यूंकि पजामे के नारे का पतंग के डोर से उलझने का खतरा होता था ….:) :) …और रही बात वैवाहिक जीवन के लुत्फ़ उठाने की तो बेशक मैं लुत्फ़ उठा रहा हूँ पर साथ हीं एक सच्चाई यह भी है की ज़िन्दगी एक chequered शर्ट की तरह होती हैं जिसमे सफ़ेद और काले रंग की धारियां होती हैं …..सफ़ेद सुख की और काली ग़म की ….मेरी मौजूदा बीबी सफ़ेद धारी है -सुख देने वाली और पहला प्यार -काली धारी जो जब तब कसक देती रहती है ….और फिर मुहब्बत तो वो जाविदाँ अहसास है ,जितनो से हो जाये कम है(MALE LOOKOUT ) :) ….क्यूँ सही कहा न मैंने ?

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    HEARTBROKEN………

    pawansrivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    NO IT IS HEART RE-INSTATEMENT

sadhna srivastava के द्वारा
May 29, 2012

उफ़!!! क्या लिखा है आपने…… मेरा तो दिल रो दिया.

    pawansrivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    मेरे लेखन में कुछ खास नहीं ..तुम मुझसे ज़ज्बाती तौर पे जुडी हो इसलिए मेरे हाले-बयानी पे तुम्हे रोना आ गया ….बहन का दिल ऐसा हीं होता है

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    “तुम कहां हो कि तुम्हें भेजी उम्मीदों की बैरन चिट्ठी मेरी, हर बार मेरे हीं पते पे लौट जाती है: तुम कहां हो कि तुम्हें भेजा मेरे मुहब्ब्त का हर पयाम, तन्हां वादियों में पूकारे आवाज के मानिंद बार-बार मेरे हीं दयार में गुंजता है: क्या कभी मेरे पुरसोज़ सांसों का कोई लम्स , कोई छूअन तुम्हें महसूस नहीं हुआ : क्या कभी मेरे आंखों से छलकते किसी अश्क के कतरे ने तुमको नहीं छुआ : क्या तुम्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं तुम्हें मुसलसल पूकार रहा हूँ : क्या तुम्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि तुम्हारे इंतज़ार में मैं अपनी सांसें हार रहा हूं: इससे पहले कि मेरे मुख्त्सर ज़िंदगी का सूरज ढल जाए कहीं : आ जाओ कि विरहन की आग में न हम जल जाएं कहीं:” क्या है ये दादा….. किसने कहा था ये सब लिखने को…. बड़ी उलझन हो रही है हमे ये सारा पढ़कर…. कितने बार पढ़े….. अच्छा हम जा रहे हैं अब……

    follyofawiseman के द्वारा
    May 29, 2012

    अदरणीय एवं पूजनीय साधना जी सादर,  “उफ़!!!” (उफ़ क्या बेकार लिख दिया…..)  ” क्या लिखा है आपने……” (जी पढ़ लीजिए जो भी लिख है….दिख नहीं रहा है क्या….) “मेरा तो दिल रो दिया.”….(ये दिल कैसे रोता है……?)

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    संदीप जी आपकी हर बात का जवाब देना ज़रूरी नहीं समझती मैं…..

    pawansrivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    साधना अच्छे बच्चे ऐसा नहीं करते :)

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 29, 2012

    संदीप जी को कहिये कि जब दो “srivastavas ” बात कर रहे हो तो बीच में न बोला करें……

    May 30, 2012

    बालिके, पंडी जी लोगों का अधिकार होता है हरेक किसी के बीच में बोलने का. अतः झा जी इसी अधिकार का उपयोग कर रहे हैं…हाँ…..हाँ…हाँ..

    sadhna srivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    Sorry Sandeep ji….. Am sorry Dada… Am not suppose to talk to ur best buddy like dis….

    pawansrivastava के द्वारा
    May 30, 2012

    Dear sadhna,you speak your heart as you do , you are better than the people who say ‘good bye’ to some one while they intend to say ‘good riddance’. so keep smiling :)


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